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स्थानीकरण से प्रादेशिक भाषाओं को स्फूर्ति

कंप्यूटर का उपयोग करने के लिए अंग्रेजी की खूब जानकारी जरूरी हैं। - ऐसी धारणा अब पुरानी बात हैं। क्योंकि, साफ्टवेयर उत्पादों के विनिर्माण में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त माइक्रोसाफ्ट जैसी बृहत संस्था समेत अनेक संस्थाएं अपने साफ्टवेयर उत्पादों के स्थानीकरण (लोकलाइजेशन) के जरिए सुनिश्चित कर रही है कि वे प्रादेशिक भाषाओं उपलब्ध हों । इसके लिए वे भाषा-वैज्ञानिकों की सहायता ले रही हैं । अब प्रादेशिक भाषा-भाषी ग्रामीण लोग भी, बिना किसी परेशानी के, विश्व को एक प्रौद्योगिकी-गाँव बनाने वाली इंटरनेट की ई-मेल, आँन लाइन चैटिंग आदि सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं ।

मातृभाषाओं में उपलब्ध…
बृहत साफ्टवेयर संस्था माइक्रोसाफ्ट ने अपने साफ्टवेयर उत्पादों से संबंधित सहायक साहित्य तथा मार्गदर्शक सुत्रों को, भाषा वैज्ञानिकों की सहायता से, क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयत्न शुरू किए हैं। इंटरनेट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली "खोज"(सेर्च) की सुविधा, लेखन में त्रुटियों को दूर करने के लिए आवश्यक "शब्द-कोश" जैसी सुविधाएँ फिलहाल कुछेक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और उनके कार्यान्वयन संबंधी प्रयोग चालू हैं। कंप्यूटर से परिचित प्रत्येक व्यक्ति द्‌वारा उपयोग की जाने वाली विंडोज़ जैसी आँपरेटिंग सिस्टम समेत वर्ड, पावर पाइंट, एक्सेल, नोटपैड जैसे प्रमुख साफ्टवेयर उत्पाद अब हमारी मातृभाषाओं में उपलब्ध हैं।

स्थानीकरण की यह प्रक्रिया साफ्टवेयर तक ही सीमित नहीं हैं। प्रमुख बैंक भी इस दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। अनेक बैंक एटिएम संबंधी हिदायतें और आदेश कुंजियों (कमांड बटन) को भी स्थानीकरण करके ग्रामीण ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने का पुरजोर प्रयास कर रही हैं । इन सबके पीछे, भाषा वैज्ञानिकों का काफी योगदान रहा हैं।

गाँवों में भी इंटरनेट…
गाँवों में भी इंटरनेट का उपयोग बढ़ गया है और इसके मद्‌दे नज़र अनेक बहुल जाति संस्थाएं, भाषा वैज्ञानिकों की सहायता से, अपनी-उपनी वेब-साइट में निहित सूचना को प्रादेशिक भाषाओं में उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही हैं । विशेषतः माइक्रोसाफ्ट की यूनीकोड फांट ने अक्षरों के आकार में एकरूपता लाई है, जिससे सारी सूचना को प्रोदेशिक भाषाओं में शीघ्र प्राप्त करना संभव हुआ है। प्रौद्योगिक-व्यवस्था इतना बेहतर हुई है कि अब प्रादेशिक भाषाओं की अक्षराकृतियों को अलग-अलग रूप से खरीदने और बचा रखने की आवश्यकता नहीं हैं । परिणामस्वरूप, मुद्रण और वेब के क्षेत्र काफी विकसित हो गए हैं ।

मोबाइल का क्षेत्र
आजकल सामान्य व्यक्ति से लेकर गणमान्य व्यक्ति तक हर कोइ मोबाइल फोन का उपयोग कर रहा हैं । इसके कारण, मोबाइल फोन की विनिर्माण संस्थाएं, भाषाविदों की सहायता से, अपने-अपने उत्पादों को प्रादेशिक भाषाओं में उपयोग करने हेतु सुयोग्य बना रही हैं । उपयोग संबंधी हिदायतें, तकनीकी बातों आदि को प्रादेशिक भाषाओं में ही दे रही हैं । इसके अलावा, नेट-सेवा प्रदान करने वाली संस्थाएँ समाचार, बाजार-समाचार, मनोरंजन और विज्ञान-परक अनेक विषयों को प्रादेशिक भाषाओं में दे रही हैं और उन भाषाओं को स्फूर्ति प्रदान कर रही हैं ।

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