| प्रोफ. जी. लक्ष्मीनारायणा से वार्तालाप |
तेलुगू और ऊसकी संबंदित विदया के सीनियर प्रोफ हैं। 34 साल के ऊपर सिक्षिक अनुभव हैं। इंहोंने 15 साल प्रोफ के जगह, 26 साल उप सचिव सचिव और ढीन के जगह रहकर निर्मान किये हैं। इनके पास दो Post Gradutation है। एक तेलुगू में और एक प्रारमयरिक इतिहास और परम्परा में। इनहोने तेलुगू पारम्रिक और इतिहास मे रिसरच कियें हैं। भाषा संबंधी में प्रशिक्षण भी लियें।( इन्होने पहली बार आदूनिक तेलुगू भाषा संबंधी पर एक पुस्तक चगवाया) द्राविढ के अन्य भाबा में भी अच्छी तरह जान्ते हैं। इंहोंने कन्नढ के 5 पुसतक अनूबाद कियें उनमें 3 मध्य साहित्य अकडमी के लिये, तमिल के कुछ काम किये। इंहोंने 10 पुसतकें, 40 अनुसंधान लेख किये हैं।
आज ये द्राविढियन विश्वविद्यालय का उपकुलपति हैं। भाषा इंदिया के लिये बात करते समय... |
| आज तमिल भाषा के लिये तंजावूर मे तमिल विश्वविद्यालय है। तेलुगू भाषा के लिये हैदराबाद मे तेलुगू विश्वविद्यालय है, और हर एक द्राविढ भाषा के लिये उसकी विश्वविद्यालय हैं। इसके अतिरिक्त मैसूर मे भाषा रिसर्च केन्द्र भी हैं। इस समय द्रिविढियन विश्वविद्यालय क्या अवश्यक्त है। |
हाँ हर एक भाषा के लिये उसकी विश्वविद्यालय है मगर वैसी एक भी नही हैं जो हमारी पारम्परीक और सांस्कृतिक एकता को दिखायें। द्रिविढियन कुडुम्ब एकता ढूंडने के कारण यह द्रिविढियन विश्वविद्यालय निर्मान किया गया है। हमारी द्रिविढियन कुडुम्ब मे 27 भाषा है। उनमें जो चिपे हए पारम्परिक रिक्थदाय है उनपर प्रकाश डालना ही हमारा लक्ष्य हैं। उनके मन में उभयनिष्ठ तात्पर्य देकर देश लाना है। द्रिविढियन कुढुम्ब के सब भाषा बोलने वालो को जानकारी और परम्परा के एकता लाने के लिये अब हम सिक्षा का प्रयोग कर रहे है। इस तरह जन मे जो भेद है भाषा में वह चुपचाप मिट जाएगा।
इसिलिये भाषा विश्वविद्यालय से ऊपर द्रिविढियन विश्वविद्यालय कि आवश्यकता हैं। हमारि द्रिविढियन विश्वविद्यालय आंद्र प्रदेश, तमिल नाडू और कर्नाटक के मिलने कि जगह जो नगर है कुप्पम उस जगह पर सिय है। ये भी एकता की जोर डालकर द्रिविढियन विश्वविद्यालय की विशेष्ता रहेगी। देश कि एकता ही इस विश्वविद्यालय के निर्माण के पीचे है। और जानकारी के लिये आप हमारे वेब सायिट www.dravidianuniversity.ac.in पर देक सकते हैं। |
| द्रिविढियन विश्वविद्यालय क्या क्या काम और कैसे किये जाते है और वे अन्य विश्वविद्यालय से कैसी अलग है। |
| हम सबी भाषओ मे कहीं मासटर डिग्री कार्याक्रम देते है और वे सब भाषा के का एकता के लिये हैं। हम मुख्य भाषा, पारम्परिक और बपौती सिक्षा देते है। कहीं स्टरीम पर आदूनिक रिसरच कि मौका भी हम देते हैं। आदूनिक रीसरच के लिये M.phil और Phd के अलावा कहीं नक्षा और कार्यक्रम भी हम देते है। ये खोज बर बढ़ाना करने के लिए देश बर और विदेश से भी senior scholars और young researchers को द्रिविढियन विश्वविद्यालय बुलाना करति है। इसपर कही उसमें इरादा भी है। (उसमे Chairs of excellence, Senior fellowships in the cadre of a professor, associate fellowships in the cadre of associate professor and fellowships for visiting scholars from India and Abroad.) द्रिविढियन सीक्षा पर बिशप कालडवेल चेर, तेलुगू सीक्षा पर सी.पी. ब्रौन चेर, कन्नड सीक्षा पर किट्टल चेर, तमिल सीक्षा पर कांस्टंटैन बेखि चेर, इनके अलावा द्रिविढियन सीक्षा के कोई भी आस्पेक्ट पर काम करकेवाले युव रिसर्च को भी कही फेल्लोशिप है। इनमें से द्रिविढियन ट्रैब्स पर काम करने वालों को मुख्यता दी जाती है। हमारी पूनिवर्सिटी के काम्पस कि शांति पूर्वक, सुन्दर एनविरानमेंट ने भारतिय पंडित को विसिटिंग फेल्लोशिप देते है। |
| अब आप Towards a history of Comparative Literature and companion of Dravidian Literature प्रजेकट कर रहें है उसके बारे मे कहिएं और इसको आप क्यों करना चाहते है। |
| भारतिय संस्कूति कहीं भाषा और स्र्किप्ट से लिखा गया हैं। उसी के आदार पर यह प्राजेक्ट है। द्रिविढियन भाषाएं और लिटटरेचर के संबंद के सिक्षा करने के लिए आदूनिक दूल्स कि आवक्श्यक्ता है। आज तक बिशप काल्डवेल से लेकर बी.एच.क्रषणमूर्ती तक कहीं अच्छा काम किया गया है। भाषा संबंदित जगह पर कही प्रजेक्ट किया गया है। मगर कम्पारिटिव स्टडीस पर कोई भी बल पूर्वक काम नहीं हैं। इसके प्रारंभ के लिए मैं यह प्रजेक्ट कर रहा हूं। |
| क्या आप द्रिविढियन विश्वविद्यालय के सफलता के बारे में कह सकते हैं। |
| क्योंकि हमारी सिर्फ 9 साल ही पुरा हुआ है हम अभी भी एक छोट्टी विश्वविद्यालय है। इन 9 सालों में पिच्ले 2 साल में हि हम यह स्यति पर पहुँचे हैं। द्राविडियन चींता को जगरण करने के लिये हम कई सेमिनारें करवाया है। द्रिविढियन सिक्षा पर कईं जोर्नले निक्कलें हैं। तमिल से अनेक पुस्तकें तुलू में अनुवाद किया गया है। तमिल, तेलुगू, कन्नड और मलैयालम जैसे मुख्य द्रिविढियन भाषाओं से तीस पस्तकें चुने गयी हैं। वे उनकी सबंघ भाषाओं में अनुवाद किया गया हैं। हम अनुवाद कि कामघर भी कहक्ट करते हैं। हमारे कम्प्यूटरैस्ढ लिगंयुस्टिक्स में मिशन द्वारा अनुवाद की जा रही है। |
| द्रिविढियन विश्वविद्यालय के अन्य प्राजेक्टसके बारे में बताइये। |
| अभी हमारी विश्वविद्यालय ने निम्नलिखित प्राजेक्टस जारी है। कुल्ट महा भारता के, मौकिका में मुख्य रिसर्च, द्रिविढियन लिट्टरेचर कार्पस कि पुनर निर्मान, द्रिविढियन तत्वविचार और साहित्य के ग्रंथ सूची, द्रिविढियन भाषाओ कि अनेक भाषा कोष। हमारी इतिहास, आर्कियालजी और संस्कृति के डिपार्टमेंट, फोकलोर और र्टैबल के डिपार्टमेंट, तमिल और अनुवाद सिक्षा के डिपार्टमेंट सीक्षा और मनुष्य बल उत्पथ्थी के डिपार्टमेंट, कम्पारिटिव द्रिविढियन लिट्टरेचर और तत्व के डिपार्टमेंट, द्रिविढियन और अनुवाद सिक्षा के डिपार्टमेंट कई रीसर्च प्रजेक्टस कर रहे हैं। |
| अब आप किन किन लक्ष्य के लिये काम कर रहे हैं। |
| हमारी पहला लक्ष्य है भाषा अनुवाद और द्रिविढियन भाषाओं के कम्पारिटिव सिक्षा का अच्छा बल बढान हमारा अगला है अनुवाद के साथ चार मुख्य द्रिविढियन भाषा का आपसी शक्ती बढाना। उसके बाद चिते हुए द्रिविढियन संस्कृति और भाषाओं का पुणरनिर्मान करना। सामान्य मनुष्य में भाषा एक रोक न रहे - इसी लक्ष्य पर काम कर रहें हैं। हम जन और स्कालर्स को हमारे साथ द्रिविढियन भाषा कि एकता में हाथ देने के लिये अस्वासन दे रहें हैं। इसके अतिरिक्त NLP और मेशिन चार मुख्य द्रिविढियन भाषाओं के अनुवाद के निर्माण करना ही मेरी अपनी लक्ष्य है। |